माँ वह कबूतर क्या उड़ा छपर अकेला हो गया| माँ के आँखे मूंदते ही घर अकेला हो गया किसी शाय र ने ठीक ही कहा है→ माँ कुदरत की बनाई हुई सौगात है जो हमारे साथ होने पर किसी की कमी महसूस नही होने देती ′′ उसके चले जाने पर कोई उसकी कमी पूरी नही कर सकता | न जाने क्यू आज अपना ही घर मुझे अनजान लगता है तेरे जाने के घर- घर नही मकान लगताहै| मेरी माँ को गए हुए आज १६ साल हो गए है उनको समर्पित करते हुए यह लेख है‖ जो हमारे साथ नही प्रभु की शरण में है वातसल्य प्रेम और सभी जीवो को समभाव रखने की प्रेरणा माँ देती है बिना माँ के साए के सब एहसान बन जाता है क्युकी पिता भी माँ से सबल है अपनी छोटी छोटी बातो की पूर्ति के लिए मजबूर दीखता है| जो कमी बेटिया मायके में मह्सूस करती है उनसे कही जायदा उनका भाई करता है| वो अपनी पत्नी से उनसब बातो को अधीर हो कर कहता है जो माँ इसारे में समझ जाती थी और हस कर कहती थी ‖मै हूँ न| ऐ शब्द मेरे ही क्या सभी के परिवार को बाँधकर रखता है l वो बंधन वो बचपन वो प्यार वो बड्डपन कोई लौटा दे हे ईस्वर हमारी माँ कोहमें वापस लौटा दे ...


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